Q1. घनानंद की रचनाओं में “अँगन” किसका प्रतीक है?
Q2. घनानंद किस नगर से जुड़े हुए थे?
Q3. “कब तैं वै सिसी सुमन के आँगन मो अँगनानि ले बससी” का मुख्य भाव क्या है?
Q4. “दिग्दिगि छूटि” का अर्थ है—
Q5. घनानंद की कविता में “निर्भीक” का अर्थ है—
Q6. घनानंद के काव्य का सर्वाधिक प्रभाव किस भाव का है?
Q7. घनानंद के काव्य में किस वस्तु का चित्रण मार्मिक है?
Q8. “जहाँ नेकु संसार बाँक नहीं” का अर्थ है—
Q9. घनानंद किस काव्य गुण के लिए विशेष प्रशंसित हैं?
Q10. घनानंद की भाषा का स्वर कैसा है?